स्वास्थ्य संस्थाओं में हाईरिस्क गर्भवतियों की स्त्री रोग विशेषज्ञांे ने की जांच,गर्भवतियों को पोषण आहार युक्त भोजन का सेवन करने की सलाह दी
खंडवा। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत् मातृ मृत्यु दर में कमी लाने व गर्भवति महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने तथा प्रसव पूर्व देखभाल की गुणवत्ता एवं कवरेज को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, निदान एवं परामर्श सेवाओं की उपलब्धता की दृष्टि के उद्देश्य से प्रति माह की 9 एवं 25 तारीख को स्वास्थ्य संस्थाओं में स्वास्थ्य शिविर लगाकर स्त्री रोग विशेषज्ञ व चिकित्सको द्वारा गर्भवति एवं हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की जांच कर उपचार किया जाता है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.ओ.पी.जुगतावत ने बताया कि 27 जनवरी मंगलवार को हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं स्वास्थ्य संस्थाओं में चिकित्सको द्वारा आवश्यक जाँच व परामर्श दिया गया। जांच के दौरान जटिलताओं को देखते हुए ऐसी चिन्हांकित गर्भवति महिलाओ को निषुल्क सोनोग्राफी के लिए खण्डवा भेजा जा रहा है। डॉ. जुगतावत ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उचित आहार एवं पोषण जच्चा बच्चा के लिए जरुरी है। गर्भवति महिलाओं व उनके परिजनों को मिशन आचंल अभियान के तहत पोषण आहार व कुपोषण से बचाव के लिए शिविर स्थल पर ही स्वास्थ्य टीम के द्वारा परामर्श सेवाएं देकर घर पर ही उपलब्घ खाद्य पदार्थाें से पोषणयुक्त भोजन सेवन करने की सलाह दी गई। ताकि गर्भावस्था के दौरान अपने स्वास्थ्य के साथ साथ अपने बच्चें को उचित मात्रा में पोषण आहार मिल सकें। गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव कराने की समझाइश भी दी गई।
हाईरिस्क गर्भवति महिलाओं की पहचान जैसे एनिमिया, उच्च रक्तचाप, शुगर, पूर्व सिजेरियन प्रसव, जुड़वा बच्चें, गर्भ में उल्टा बच्चा, पूर्व में गर्भपात, पूर्व में जन्में षिषु में जन्मजात विकृति, कम वर्ष व 35 वर्ष से अधिक उम्र में गर्भधारण होना, अधिक बच्चे होना तथा टीबी, गुरदे, हदय रोग, मलेरिया, एचआईवी, हैपेटाइटिस बी जेसे रोगो से ग्रसित गर्भवति महिलाएं हाईरिस्क की श्रेणी में आती है।
