प्रसंगवश: डॉ. बी. के. जैन के स्वर्गारोहण पर संवेदना,मौन तपस्वी साधक की जीवन यात्रा का हुआ अवसान,”निधन से शोकाकुल है चित्रकूट की पावन धरती”।

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प्रसंगवश: डॉ. बी. के. जैन के स्वर्गारोहण पर संवेदना,मौन तपस्वी साधक की जीवन यात्रा का हुआ अवसान,”निधन से शोकाकुल है चित्रकूट की पावन धरती”।IMG 20260228 WA0023 IMG 20260228 WA0022

(डॉ. राकेश मिश्र)

जन्म लेने वाले प्रत्येक मनुष्य के लिए मृत्यु भी तय है। लेकिन कुछ लोगों की मृत्यु क्षेत्र और समाज को भी आहत कर जाती है। दैहिक रूप से वे भले ही नहीं होते हैं, लेकिन उनका व्यक्तित्व और कृतित्व उन्होंने अविस्मरणीय बना देता है। इसी तरह एक वियोग का दंश चित्रकूट की धरती को मिला है। सेवावृति के व्यक्तित्व, आधुनिक नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में आजीवन सेवा, साधना और समर्पण के प्रतीक रहे डॉ. बी. के. जैन का 27 फरवरी 2026 को चित्रकूट की पावन भूमि पर निधन हो गया। उनके स्वर्गवास से न केवल चित्रकूट, बल्कि संपूर्ण देश के चिकित्सा, सामाजिक एवं सेवाक्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है। इसकी भरपाई असंभव है।

डॉ. बी. के. जैन ने सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय के माध्यम से पाँच दशकों से अधिक समय तक बुंदेलखंड एवं विन्ध्य क्षेत्र जैसे दूरस्थ एवं असुविधा-प्रधान क्षेत्र में रहकर निःस्वार्थ भाव से नेत्र सेवा को अपना जीवन-व्रत बनाया और उस पथ पर जीवन पर्यंत चलते रहे। उनके कुशल नेतृत्व में यह संस्थान नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित हुआ और करोड़ों निर्धन, वंचित एवं ग्रामीण जनों के लिए आशा का केंद्र बना। उनकी सेवाओं के सम्मान में उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से भी अलंकृत किया गया।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी की चित्रकूट यात्रा के अवसर पर सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय द्वारा किए जा रहे जनसेवा के कार्यों की खुले मंच से प्रशंसा की गई थी। यह सराहना डॉ. जैन की दूरदृष्टि, तप और सेवा-निष्ठा का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान थी।

इस महान सेवा यात्रा में समाजसेवी श्री विशद मफतलाल का योगदान भी अत्यंत सराहनीय रहा। उनके उदार सहयोग और मानवीय संवेदना से सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय को सुदृढ़ आधार मिला और असंख्य नेत्र रोगियों के जीवन में पुनः प्रकाश आया।

डॉ. बी. के. जैन के सेवा-व्रत में उनका पूरा परिवार सदैव कंधे से कंधा मिलाकर सहभागी रहा। उनके सुपुत्र डॉ. इलेश जैन एवं आदरणीय भाभी जी ने निरंतर समर्पण, त्याग और सेवा-भाव के साथ जंगल में रहकर उनके कार्यों को आगे बढ़ाया। परिवार की यह एकजुटता सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय की सेवा-संस्कृति की सशक्त आधारशिला बनी।

डॉ. बी. के. जैन का *पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास के तत्वावधान में आयोजित होने वाले नेत्र शिविरों में बुंदेलखंड एवं विंध्य क्षेत्र में सदैव पूर्ण योगदान रहता था।* वे चिकित्सकीय मार्गदर्शन के साथ-साथ शिविरों की योजना, संसाधन उपलब्धता और सेवा-समन्वय में भी सक्रिय भूमिका निभाते थे। उनके सहयोग से इन क्षेत्रों के सुदूर ग्रामीण एवं अत्यंत निर्धन नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण नेत्र चिकित्सा पहुँच सकी और हजारों लोगों को दृष्टि का वरदान प्राप्त हुआ।

डॉ. बी. के. जैन का संपूर्ण जीवन मानवता, करुणा और सेवा का अनुपम उदाहरण रहा। उनके निधन से उत्पन्न रिक्तता की भरपाई कठिन है, किंतु उनके द्वारा स्थापित सेवा-परंपरा सदैव समाज का मार्गदर्शन करती रहेगी। शारीरिक रूप से भले ही वे उपलब्ध नहीं होंगे, लेकिन उनकी कृति लोगों के स्मृति पटल पर सदैव स्मरणीय रहेगा।
पद्म श्री डॉ. बी. के. जैन जी का अब सबके लिए अपूर्णीय क्षति है । पं. गणेश प्रसाद मिश्र सेवा न्यास के स्वास्थ्य शिविर कार्यक्रम में उन्होंने जो शब्द व्यक्त किए, वह आज भी कानों में झंकृत हो रहे हैं।
ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार, सहयोगियों एवं अनुयायियों को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति दें। उनके प्रति भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए शब्द कम पड़ रहे हैं। प्रभु श्रीराम जी उनको अपने श्रीचरणों में स्थान दें। उनके परिजनों एवं सद्गुरू परिवार को यह दुःख सहन करने का सामर्थ्य प्रदान करें।

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