कल्दा के जंगलों में कुलांचे भरते दिखे चिंकारा, वनरक्षक के कैमरे में कैद हुआ मनमोहक दृश्य।
दक्षिण पन्ना वनमंडल के कल्दा क्षेत्र के जंगलों में प्रकृति का एक अत्यंत मनोहारी दृश्य सामने आया है। वनरक्षक श्री वीरेन्द्र पटेल ने भारतीय गज़ेल अर्थात चिंकारा के एक सुंदर जोड़े को अपने कैमरे में बेहद आकर्षक ढंग से कैद किया है। तस्वीर में चिंकारा अपनी स्वाभाविक चपलता, सतर्कता और फुर्ती के साथ घास के मैदानों में कुलांचे भरते दिखाई दे रहे हैं। अपनी शर्मीली प्रवृत्ति और तेज गति के लिए पहचाने जाने वाले चिंकारा की इस प्रकार की जीवंत तस्वीरें बहुत कम देखने को मिलती हैं। यह दृश्य कल्दा क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता एवं सुरक्षित वन्यजीव आवास का सशक्त प्रमाण प्रस्तुत करता है।
चिंकारा भारत की अत्यंत सुंदर एवं आकर्षक मृग प्रजातियों में से एक है। इसे “इंडियन गज़ेल” भी कहा जाता है। यह जीव बहुत कम पानी में भी जीवित रहने की क्षमता रखता है तथा अपनी अधिकांश जल आवश्यकता वनस्पतियों एवं घास से पूरी कर लेता है। अपनी अद्भुत सतर्कता, तीव्र दृष्टि और तेज दौड़ने की क्षमता के कारण चिंकारा को रेगिस्तानी एवं शुष्क क्षेत्रों का अत्यंत अनुकूलित वन्यजीव माना जाता है। खतरा महसूस होने पर यह कई फीट ऊँची छलांग लगाते हुए तेज गति से दौड़ सकता है, जो इसे शिकारी जीवों से सुरक्षित रहने में मदद करता है।
वन विभाग के मैदानी अमले द्वारा कैद की गई यह तस्वीर सोशल मीडिया पर भी वन्यजीव प्रेमियों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यह केवल एक सुंदर वन्यजीव दृश्य नहीं, बल्कि दक्षिण पन्ना वनमंडल में वन संरक्षण एवं वन्यजीव सुरक्षा हेतु किए जा रहे सतत प्रयासों की सकारात्मक झलक भी प्रस्तुत करती है।
