राष्ट्रपति के समक्ष गूंजी निमाड़ की आवाज, खंडवा-बुरहानपुर को इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ से जोड़ने की मांग राष्ट्रपति तक पहुंची, न्याय की राह आसान करने की पहल।

ओंकारेश्वर प्रवास पर आईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के समक्ष निमाड़ अंचल की वर्षों पुरानी मांग पहुंची है। पंधाना विधायक छाया मोरे ने खंडवा और बुरहानपुर जिलों को जबलपुर हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार से हटाकर इंदौर खंडपीठ से जोड़ने की मांग करते हुए राष्ट्रपति को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। विधायक ने इस मुद्दे से जुड़े विधानसभा प्रश्न, शासकीय जवाब, राजभवन पत्राचार और अन्य दस्तावेज भी राष्ट्रपति को उपलब्ध कराए।
विधायक छाया मोरे ने राष्ट्रपति को बताया कि वर्तमान में खंडवा और बुरहानपुर के नागरिकों को उच्च न्यायालय संबंधी मामलों के लिए करीब 500 किलोमीटर दूर जबलपुर जाना पड़ता है। इससे आम लोगों को समय, धन और श्रम की अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है। जबकि इंदौर खंडपीठ की दूरी अपेक्षाकृत कम होने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुलभ और सुविधाजनक हो सकती है।
विधायक ने बताया कि यह विषय विधानसभा में प्रश्न क्रमांक 628 के माध्यम से उठाया गया था। प्राप्त उत्तर में राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 की धारा 51 के तहत राष्ट्रपति को उच्च न्यायालय की पीठ के क्षेत्राधिकार निर्धारण का अधिकार बताया गया है। इसी आधार पर उन्होंने राष्ट्रपति से आवश्यक पहल करने का अनुरोध किया।
मांग पत्र में कहा गया है कि खंडवा और बुरहानपुर के लाखों नागरिकों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों को न्याय प्राप्त करने के लिए अनावश्यक दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता है और समय की हानि होती है। ऐसे में दोनों जिलों को इंदौर खंडपीठ से जोड़ना जनहित में जरूरी है।
इस अवसर पर विधायक छाया मोरे पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में नजर आईं। उन्होंने निमाड़ और जनजातीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हुए क्षेत्रवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को राष्ट्रपति के समक्ष प्रमुखता से रखा।
गौरतलब है कि खंडवा जिला न्यायालय को इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ से जोड़ने की मांग लंबे समय से उठती रही है, लेकिन पहली बार यह मामला विधानसभा, राजभवन और अब राष्ट्रपति कार्यालय तक पहुंचा है। इससे निमाड़ अंचल के लोगों में उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लिया जा सकता है।
शेख़ आसिफ खंडवा
