बढ़ती लागत, अस्थिर बाजार और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे किसानों के लिए इस बजट में राहत के नाम पर केवल औपचारिक घोषणाएं की गई हैं “उत्तमपाल सिंह”

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बढ़ती लागत, अस्थिर बाजार और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे किसानों के लिए इस बजट में राहत के नाम पर केवल औपचारिक घोषणाएं की गई हैं “उत्तमपाल सिंह”IMG 20260202

बजट में युवाओं, किसानों और अर्थव्यवस्था की चुनौतियों की अनदेखी ,मोदी सरकार के इस बजट में भी मजदूर, किसान और बेरोज़गार युवा पूरी तरह नज़रअंदाज़ किए गए हैं-
“प्रतिभा रघुवंशी”

खंडवा।
केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष (ग्रामीण) उत्तमपाल सिंह ने कहा कि यह बजट देश की वास्तविक आर्थिक परिस्थितियों और आमजन की समस्याओं के प्रति असंवेदनशील एवं दिशाहीन है। उन्होंने कहा कि आज देश का युवा बेरोज़गारी से जूझ रहा है, रोजगार के अवसर लगातार सिमटते जा रहे हैं, लेकिन बजट में युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस रोडमैप दिखाई नहीं देता।
बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तमपाल सिंह ने कहा कि देश से पूंजी समेटकर निवेशकों का लौटना और घरेलू बचत का ऐतिहासिक गिरावट पर पहुंचना अर्थव्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। इसके बावजूद बजट में निवेश को प्रोत्साहित करने और भरोसा बहाल करने के लिए कोई प्रभावी पहल नहीं की गई है।
जिला कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता प्रेमांशु जैन ने कहा कि किसान आज कर्ज़ के बोझ और अनिश्चित भविष्य के दबाव में जी रहा है। बढ़ती लागत, अस्थिर बाजार और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे किसानों के लिए इस बजट में राहत के नाम पर केवल औपचारिक घोषणाएं की गई हैं, जो ज़मीनी स्तर पर नाकाफी साबित होंगी।
बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष ( शहर)
प्रतिभा रघुवंशी ने कहा कि वैश्विक आर्थिक झटकों की आशंका पहले से स्पष्ट है, लेकिन बजट में उनसे निपटने की कोई ठोस तैयारी या रणनीति नजर नहीं आती। ऐसे समय में देश को दूरदर्शी और संवेदनशील बजट की आवश्यकता थी, लेकिन प्रस्तुत बजट आम जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता।प्रतिभा रघुवंशी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस बजट का विरोध करती है और देश के युवाओं, किसानों, मध्यम वर्ग और कमजोर तबकों के हितों के लिए संघर्ष जारी है।

“बजट पर कांग्रेस शहर इकाई की कड़ी प्रतिक्रिया”
प्रतिभा रघुवंशी ने कहा कि मोदी सरकार के इस बजट में भी मजदूर, किसान और बेरोज़गार युवा पूरी तरह नज़रअंदाज़ किए गए हैं। यह बजट आम जनता की ज़रूरतों को पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है। पूरा बजट देखने के बाद यह साफ़ हो जाता है कि यह आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि मोदी जी के मित्रों और चंद बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों की रक्षा का दस्तावेज़ है।
मध्यम वर्ग को इस बजट से आयकर में राहत की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने एक बार फिर उन्हें निराश किया। जहां बड़े-बड़े कॉरपोरेट घरानों के हज़ारों करोड़ रुपये के कर्ज़ माफ़ किए जा सकते हैं, वहीं ईमानदारी से टैक्स भरने वाले आम नागरिकों की जायज़ मांगों पर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया।
किसानों की आय दोगुनी करने का वादा करने वाली सरकार इस बजट में एमएसपी की कानूनी गारंटी, खेती की बढ़ती लागत और ग्रामीण संकट पर पूरी तरह मौन है। मज़दूर वर्ग के लिए न तो मज़दूरी बढ़ाने की कोई योजना है और न ही सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने का कोई ठोस प्रावधान।
युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर पैदा करने की बजाय यह बजट बेरोज़गारी को और बढ़ाने वाला साबित होगा। शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश न के बराबर है।
जैसा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी जी लगातार कहते आ रहे हैं कि बजट से दलित, आदिवासी और वंचित समुदाय गायब हैं, इस बार भी वही सच्चाई सामने आई है। पलायन को मजबूर आदिवासी समाज और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए इस बजट में कोई विशेष राहत या ठोस योजना नहीं है।
कांग्रेस शहर इकाई स्पष्ट शब्दों में कहती है कि यह बजट आम जनता के लिए उम्मीद नहीं बल्कि निराशा लेकर आया है। हम इस जनविरोधी बजट का पुरज़ोर विरोध करते हैं और मजदूर, किसान, युवा, दलित, आदिवासी और मध्यम वर्ग के हक़ के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

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