अतिरुद्रमाहायज्ञ में 25 कुंड में 75 श्रद्धालुओं ने 2 लाख 19 हजार 231 आहुतियां दी,मंत्रोच्चार की गूंज से वातावरण हुआ धर्म मय..

हटा। उपकाशी हटा में पहली बार देवश्री गौरीशंकर मंदिर प्रांगण मैं आयोजित 10 दिवसीय श्री श्री 1008 श्री महारूद्र महायज्ञ का आयोजन शुक्रवार को यज्ञाचार्य पंडित श्री मथुरा प्रसाद जी के सानिध्य में विद्वान पंडितो द्वारा विधि विधान के साथ पूजन अर्चन कर 25 कुंडीय यज्ञशाला में 71 यजमानों द्वारा आहुति देकर महायज्ञ का श्री गणेश हुआ। मंत्रोच्चार की गूंज से वातावरण धर्म मय हो गया। जल से भरे कलशों को यज्ञशाला में स्थापित किया गया है। योगाचार्य वाराणसी के विख्यात पंडित मथुरा प्रसाद जी शास्त्री ने बताया कि महारूद्र यज्ञ का शुभारंभ शुक्रवार की सुबह दूल्हा भेष धारी गौरीशंकर भगवान का रुद्राभिषेक हुआ।सुबह 7 बजे से मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ विधि विधान के अनुरूप पार्थिव शिवलिंग बनाए तदुपरांत गाजे बाजे के साथ सुनार नदी के घुराघाट तट पर मंगल आरती और पूजन अर्चन कर विसर्जन किये गए। वही विधि विधान के साथ सभी देवी देवताओं का आवाह्न कर 11 पंडितों के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन अर्चन कर अतिरुद्रमाहायज्ञ किया गया। 5 पंडितों द्वारा महामृत्युंजय जाप 3 पंडितों द्वारा दुर्गा सप्त पाठ कराया। जिसमें प्रथम दिवस 71 यजमानों द्वारा जनकल्याण के लिए आहुतियां दी गई। मुख्य यजमान सापत्नी कुँ पुष्पेंद्र सिंह हजारी बनाए गए है। शास्त्री जी ने बताया कि प्रथम दिवस 2 लाख 19 हजार 231 आहुतियां दी गई जिसमें यज्ञ के समापन तक 24 लाख 11 हजार 541 आहूति के साथ यज्ञ का समापन होगा। महारूद्र यज्ञ में रोजाना नये यजमान द्वारा यज्ञ में सम्मिलित होकर आहुतियां की जावेगी। वही यग शाला की परिक्रमा करने से सभी कष्टों का निवारण होता है। बड़ी सँख्या में श्रद्धालु यज्ञ स्थल पर पहुचकर धर्म लाभ अर्जित कर रहे है।
